संत युहन्ना सी० एन० आई० उपासनालय हुटुबदा मण्डली
विषय :- नया उपसनालय का शहरपनाह के संबंध में,
आइये हम लोग जानते हैं शहरपनाह के बारे में कैसे बात शुरू हुई,
संत युहन्ना सी० एन० आई० उपासनालय हुटुबदा मण्डली का उद्घाटन एवं संस्कार समारोह 10 फरवरी 2026 को संपन्न हुई | 18 फरवरी 2026 को राख बुधवार था उसी दिन गिरजा समापन के बाद मण्डली के चरवाहा हरदुगन हेमरोम इस बात को रखा कि 20 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को रांची से पादरी बसंत हेमरोम,सुनील ग्रूम,मंगल तोपनो,और अब्राहम डांग इसी उपसनालय में आएंगे और इस नवनिर्मित उपासनालय को सुरक्षित रखने के लिए शहरपनाह के विषय में बात रखेंगे बोला . मण्डली का चरवाहा मण्डली के लोगों से कहता है आपलोगों का क्या कहना है,शहरपनाह के लिए आर्थिक सहायता भी देने बात किया है |
शहरपनाह अभी करेंगे या बाद में करेंगे लेकिन फिर भी हमलोगों को करना तो पड़ेगा ही | तब मण्डली के लोग उठ कर जवाब देने लगते हैं और कहते हैं अगर सारा सपोर्ट उन्ही लोगों के तरफ से रहेगा तो ठीक है अगर हमलोग को भी कुछ आर्थिक सपोर्ट देना होगा तो संभव नहीं है क्योंकि हमलोग का तो नया उपसनालय को बनाने से लेकर उद्घाटन एवं संस्कार करने तक में ही हमलोग का कमर ढीला हो चूका है तो कहां से हो पाएगा,नहीं हो पाएगा .ठीक है अगर सारा सपोर्ट वही लोग देगा तो काम किया जा सकता है इस प्रकार से मण्डली ने मण्डली के चरवाहा को जवाब दिया |
मण्डली के चरवाहा
दिनांक 20 फरवरी 2026 दिन शुक्रवार को प्रभोज आराधना शुरू हुई,नया उपसनालय बना उसका धन्यवाद चढ़ाया गया,आराधना संपन्न होने के बाद रांची से आए हुए सभी को सामने में बुलाया गया और कुर्सी पे बैठाया गया और तालियों से स्वागत किया गया और नया उपसनालय उद्घाटन एवं संस्कार समारोह में आपको कैसा लगा,कैसा रहा पूछा गया | पर जवाब आया संस्कार समारोह बहुत अच्छा रहा, किसी का जवाब आया प्रोग्राम अच्छा रहा पर प्रोसेसन के समय क्रूस का इस्तेमाल नहीं किया गया,और किसी का जवाब आया कुछ कुछ लोगों को सम्मानित नहीं कर पाए,तो हमलोग रांची में ही बुला कर सम्मानित कर दिए,और प्रोग्राम तो बहुत अच्छा रहा इसमें कोई शक नहीं है|फिर किसी ने कहा इस उपसनालय को सजाना सवारना हमलोग का काम है, इस उपसनालय को डाकुओं का खो नहीं बनाना है कहा |
उपसनालय का शहरपनाह करना
अब बरी आता है इस उपसनालय का शहरपनाह करना | पादरी बसंत हेमरोम,सुनील ग्रूम,मंगल तोपनो,और अब्राहम डांग, इन लोगों ने कहा कि इस नया उपासनालय का शहरपनाह बनाना अति आवश्यक है,आपलोगों का क्या निर्णय है ? सहयोग हमलोग करेंगे बोला | तब मण्डली के पूर्व प्रचारक अब्राहम टोपनो ने कहा आपलोगों ने हमारे मण्डली में आते रहे हैं यहाँ की परिस्थिति को देखकर आपलोगों ने इस मण्डली के लिए बहुत सहयोग दिए हैं,इसके लिए आपलोगों को बहुत बहुत धन्यवाद|आब बारी आ रही है शहरपनाह का, आपलोग हमलोगों को सहयोग करेंगे तो बोल रहे हैं पर कितना सहयोग करेंगे हमलोग का तो पूरा कमर ही ढीला हो चूका है, यदि आपलोग पूरा सहयोग करेंगे तो ठीक है मण्डली तैयार है करने के लिए |
लेकिन बात आई पचास दिन के अन्दर शहरपनाह पूरा करना ही है और 6 मई को उसका उद्घाटन करना है | फिर मण्डली के वर्तमान प्रचारक मण्डली से कहता है अभी समय कहने का काम करोगे या नहीं, अभी हम जिम्मेवारी ले लेंगे फिर काम करोगे नहीं,आवोगे नहीं फिर फंसेगा कौन? हम | काम करना है तो काम करेंगे बोलिए लेकिन काम करना ही पड़ेगा|मण्डली ने करने का फैसला किया, फिर बात आई कि 52वें दिन के अन्दर तो संभव नहीं है अभी तो महुवा का भी सीजन आ गया है,हां अगर तार लगाया जाए तो संभव हो सकता है बोला गया | फिर बात हुआ मजबूत तार जो कि थाना में उपयोग होता है ऐसा वाला तब मण्डली ने सोचा इसमें तो बहुत दिक्कत हो जायेगा बच्चे खेलने के जायेंगे कट भी सकते हैं बैल बकरी भी कट सकते हैं , और तो और तार लगाने पर डबल खर्चा होगा बाद में, इसलिए जो भी खर्चा लगे ईंट से ही शहरपनाह करना है निर्णय हुआ |
शहरपनाह का फाइनल निर्णय
और इस नया उपसनालय का शहरपनाह का फाइनल निर्णय दो साल के अन्दर पूरा करना है निर्णय हुआ |काम करने वालों को मजदूरी भी दिया जायेगा शहर से कम रेट पर,और नेहमिया ने कहा जहां पर लड़कों का काम होता है और आपलोग लड़कियों को भेज देते हैं फिर लड़की क्या करेगी,जब लड़की का काम हो तब ही लड़की को भेजें,घर में कोई लड़का ही न हो तो कोई बात नहीं | सब सहमत हो गए, और फाइनल निर्णय सक्रिय हुआ |और संडे स्कूल के शिक्षक कन्दुलना ने कुदाली गैयता लाया और जगह को देखकर हतिबरी पेरिश पुरोहित उलसन बरवा,पादरी बसंत हेमरोम और मण्डली के पूर्व प्रचारक अब्राहम टोपनो इन सभी ने पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से गैंता चला कर शहरपनाह का उद्घाटन किया |
और देखें :
- प्रेम संगीत भजन गीत लिरिक्स
- रिवाइवल सोंग्स
- जीदन सेन होरा
- आत्मिक शांति मधुर गीत
- कलवारी से यीशु की वाणी
- क्रूस वाणी सभी सात वचन
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