संत पैट्रिक्स चर्च, कामडारा में सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ LDP CAMP–2026

LDP CAMP 2026 | St. Patricks Cni Church Kamdara | Chotanagpur Diocese


छोटानागपुर डायोसिस के केंद्रीय युवा समिति (Central DCYM) द्वारा आयोजित लीडरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम (LDP) कैंप–2026 का सफल आयोजन 7 जून से 9 जून 2026 तक संत पैट्रिक्स चर्च, कामडारा में किया गया। इस तीन दिवसीय नेतृत्व विकास शिविर में छोटानागपुर डायोसिस के नौ धर्मजिलों के विभिन्न पास्टरेटों से बड़ी संख्या में युवा प्रतिनिधियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिविर का उद्देश्य युवाओं में आत्मिक विकास, नेतृत्व क्षमता, अनुशासन, सेवा-भाव तथा उत्तरदायित्व की भावना को विकसित करना था।

शिविर का शुभारंभ प्रतिभागियों के आगमन एवं पंजीकरण से हुआ। इसके पश्चात सभी माननीय अतिथियों एवं प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया गया। उद्घाटन सत्र में  राइट रेव. बी. बी. बास्के द्वारा प्रारंभिक प्रार्थना कर शिविर का विधिवत शुभारंभ किया गया। इसके बाद केंद्रीय DCYM द्वारा सभी विशिष्ट अतिथियों का स्वागत किया गया तथा उनका परिचय कराया गया। दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम को औपचारिक रूप दिया गया और सामूहिक आराधना गीत द्वारा वातावरण को आध्यात्मिक बनाया गया।

उद्घाटन सत्र में राइट रेव. बी. बी. बास्के ने मुख्य विषय पर प्रेरणादायी संदेश देते हुए युवाओं को प्रभु के वचन के अनुसार जीवन जीने तथा जिम्मेदार नेतृत्व विकसित करने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद सभी प्रतिभागियों का परिचय कराया गया। शिविर की प्रशासनिक व्यवस्था को सुचारु रूप से संचालित करने हेतु लेखा सचिव का चयन किया गया तथा शिविर के नियम, उद्देश्य एवं दिशा-निर्देशों की जानकारी दी गई। इसी के साथ प्रथम दिवस का समापन हुआ।

शिविर का दुसरा दिन

दूसरे दिन का आरंभ प्रभु की स्तुति एवं आराधना से हुआ। तत्पश्चात माननीय पुरोहित मुकुट कंडुलना द्वारा पौलुस के जीवन पर आधारित  प्रेरणादायक बाइबल अध्ययन कराया गया। बाइबल अध्ययन के पश्चात ध्वजारोहण सम्पन्न हुआ तथा सभी प्रतिभागियों ने सामूहिक रूप से नाश्ता किया।

इसके बाद विभिन्न विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा नेतृत्व विकास से संबंधित महत्वपूर्ण सत्र आयोजित किए गए। श्री प्रवीण बाजराय ने LDP का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए बताया कि एक प्रभावी लीडर केवल स्वयं नहीं बढ़ता, बल्कि दूसरों को भी आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करता है। श्री अभिषेक तिग्गा ने "Be a Good Influencer" विषय पर युवाओं को समाज में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बनने का संदेश दिया।

आगे के सत्र में पूर्व समिति के सदस्यों द्वारा सभापति, सचिव एवं कोषाध्यक्ष के दायित्वों एवं कार्यों की विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। इसके पश्चात श्री लियोनार्ड टोपनो ने "Ai Helping Mankind or Hampering Mankind" ए आई  के विषय पर प्रभावशाली विचार प्रस्तुत करते हुए मानवता की सेवा के महत्व पर प्रकाश डाला। वहीं रेव. विकला बाखला ने नेतृत्व के 7C सिद्धांतों की विस्तृत व्याख्या करते हुए सफल नेतृत्व के आवश्यक गुणों से युवाओं को परिचित कराया।

शिविर के दौरान "Explore Yourself" नामक विशेष सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें युवाओं को अपनी क्षमताओं, व्यक्तित्व और नेतृत्व गुणों को पहचानने का अवसर मिला। 

शिविर का तीसरा दिन

सबसे पहले तो प्रभोज आराधना हुई इसके तत्पश्चात नास्ता हुआ पुड़ी छोला के साथ , इसके तत्पश्चात अतिथियों का स्वागत हुई | समापन से पूर्व रेव. एनेम जोसेफ हेरेंज ने मूल वचन (1पतरस 5:3) पर आधारित निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए युवाओं को सीखी गई बातों को अपने जीवन में अपनाने का आह्वान किया। फिर सामुहिक क्रियालाप हुआ |

शिविर को केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं रखा गया। युवाओं के शारीरिक एवं मानसिक ताजगी के लिए समय-समय पर एक्शन सॉन्ग, सामूहिक गतिविधियाँ तथा मनोरंजक कार्यक्रम आयोजित किए गए। साथ ही प्रतिभागियों को बालाघाट भ्रमण भी कराया गया, युवा बस में संगीत करते हुए बालाघाट पंहुचा, पहुचते साथ लस्सी भी दिया गया, लस्सी को चुस्की मरते हुए नदी की तरफ उतरा युवा, फिर मंदर की ताल मे नाचे युवा, युवाओं का मन ख़ुशी से भर उठा, गदगद हो गए युवा,  जहाँ उन्होंने प्रकृति के बीच आपसी सहभागिता और टीम भावना का अनुभव किया। इन गतिविधियों ने पूरे शिविर को जीवंत, उत्साहपूर्ण और यादगार बना दिया।

तीन दिनों तक चले इस नेतृत्व विकास शिविर का समापन धन्यवाद ज्ञापन एवं अनुग्रह वचन के साथ हुआ। सभी प्रतिभागी अपने-अपने क्षेत्रों में लौटते समय केवल मधुर स्मृतियाँ ही नहीं, बल्कि एक जिम्मेदार, सेवाभावी और मसीह-केंद्रित नेतृत्व का संकल्प भी अपने साथ लेकर गए।

यह शिविर वास्तव में युवाओं के लिए सीखने, आत्मिक रूप से बढ़ने, नेतृत्व कौशल विकसित करने और एक-दूसरे के साथ विश्वास एवं सहभागिता का संबंध मजबूत करने का एक प्रेरणादायक अवसर सिद्ध हुआ। आशा है कि यहाँ प्राप्त शिक्षाएँ भविष्य में कलीसिया तथा समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगी।

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