Church of North India (CNI) कलीसिया की उत्पत्ति और इतिहास
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| History of the Cni Church |
उत्तर भारत में कलीसियाई एकता (Church Union) की प्रक्रिया वर्ष 1929 में विभिन्न परामर्श बैठकों (Consultations) के माध्यम से आरम्भ हुई। इसके बाद कई Round Table Conferences आयोजित की गईं, जिनमें एक “आधार–पत्र” (Basis of Negotiations) तैयार किया गया।
वार्ता और संगठन
* United Church of Northern India
* Church of India, Pakistan, Burma and Ceylon
* Methodist Church in Southern Asia
* Council of Baptist Churches in Northern India
वर्ष 1957 में दो और कलीसियाएँ इस वार्ता में सम्मिलित हुईं;-
* Church of the Brethren
* Disciples of Christ
अंततः वर्ष 1965 में एकता की अंतिम योजना (Final Plan of Union) पूरी की गई।
स्थापना
हालाँकि Methodist Church in Southern Asia ने बाद में इस एकता में सम्मिलित न होने का निर्णय लिया, परंतु Methodist Church (British and Australasian Conferences) इस एकता का भाग बनी।
एकता का उद्देश्य और आधार
इस एकता आंदोलन के पीछे मुख्य विश्वास यह था कि विभाजित कलीसिया एक सुसमाचार और एक प्रभु की प्रभावी गवाही नहीं दे सकती, विशेषकर भारत जैसे देश में जहाँ धर्मों, भाषाओं और संस्कृतियों की विशाल विविधता है।
पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में निम्न बातों में एकता स्थापित की गई-
बपतिस्मा (Baptism) और प्रभु भोज (Lord’s Supper) की समझ और अभ्यास में
तीन प्रकार की सेवकाई (Threefold Ministry):
* प्रेज़बिटर/पास्टर (Presbyters/Pastor)
संगठनात्मक ढाँचे में(ऑर्गेनाइज़ेशनल स्ट्रक्चर)
* पास्टरेट/पेरिश (Pastorates)
* डायोसीज़ (Dioceses)
एपिस्कोपेसी (Episcopacy) को संवैधानिक और ऐतिहासिक दोनों रूपों में स्वीकार किया गया।
विभिन्न आराधना संबंधी विधियाँ (Liturgical Practices) और ईश्वरीय प्रकाशन (Divine Revelation) की भिन्न–भिन्न धार्मिक समझ को भी स्थान दिया गया, बशर्ते वे कलीसिया के मूल विश्वास और व्यवस्था (Faith and Order) के विरुद्ध न हों तथा उसकी एकता और सहभागिता को बाधित न करें।
29 नवम्बर 1970 को एकीकृत होने वाली छह कलीसियाएँ
3. Disciples of Christ
4. Church of India (पहले का नाम Church of India, Pakistan, Burma and Ceylon था)
5. Methodist Church (British and Australasian Conferences)
6. United Church of Northern India
1. उत्तरी भारत में बैपटिस्ट कलीसियाओं की परिषद / (उत्तरी भारत की बैपटिस्ट कलीसिया)
2. भारत में ब्रेथ्रेन कलीसिया
3. मसीह के चेले (डिसाइपल्स ऑफ क्राइस्ट कलीसिया)
4. भारत की कलीसिया (पूर्व नाम: भारत, पाकिस्तान, बर्मा और सीलोन की कलीसिया)
5. मेथोडिस्ट कलीसिया (ब्रिटिश और ऑस्ट्रेलियाई सम्मेलन)
6. उत्तरी भारत की संयुक्त कलीसिया
इस प्रकार Church of North India भारत में एक महत्वपूर्ण एकीकृत प्रोटेस्टेंट कलीसिया के रूप में स्थापित हुई, जो आज भी सुसमाचार प्रचार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से काम कर रही है।
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