छोटानागपुर डायसिस के सभी बिशपों के नाम 


Names of all the bishops of Chhotanagpur Diocese




 प्रथम बिशप - राइट रेव्ह जेबेज कोरनेलियुस ह्विटली (1890-1904) तक


छोटानागपुर के बिशप बनाये जाने के पूर्व पाद्री ह्विटली  दिल्ली में सेवारत रहे  थे।  मेट्रोपोलिटन द्वारा उन्हें छोटानागपुर का बिशप बनाये जाने का निमंत्रण भेजा गया, उन्होंने आमंत्रण स्वीकार किया।  23 मार्च 1990 को,कथीड्रल में बिशप के रूप में पाद्री ह्विटली का बिशप संस्कार हुआ. 40 वर्षों तक भारतवर्ष में सेवा देने के उपरांत इनका देहांत हो गया। अपनी मृत्यु से पूर्व 14 वर्षों तक छोटानागपुर डायोसिस के बिशप के रूप में सेवा दिए। 


  रांची डायसिस के द्वितीय बिशप - राइट रेव्ह फ़ॉस्स वेस्टकोट (1905-1919) तक 


बिशप वेस्टकोट, बिशप ह्विटली के भतीजे थे, 1905 में डायोसिस के बिशप के रूप  में इन्होने पदभार ग्रहण किया।  अपने बिशापीय सेवाकल में शिक्षा का प्रसार तथा डायोसिस की आत्मनिर्भरता पर इन्होंने विशेष पहल की।  रांची जिला स्थित नामकोम में बिशप वेस्टकोट बोयज स्कूल के संस्थापक भी रहे। उन्होंने  1905 से 1919 तक द्वितीय बिशप के रूप में डायोसिस का मार्गदर्शन किया। 


छोटानागपुर डायसिस के तृतीय बिशप- राइट रेव्ह एलेक्स वुड (1919 -1926 ) तक 


एस पी जी  के स्वर्ण जयंती के स्वर्णिम समय पादरी एलेक्स वुड का बिशपीय पद पर अभिषेक संत पौल्स कथीड्रल रांची में  06 दिसंबर 1919 में  हुवा  था।  इसके सेवा कल में डायोसिस के लिए संविधान का निर्माण किया गया .नामकोम में लड़के लडकियों के लिए  बिशप वेस्टकोट स्कूल का शुभारम्भ किया गया।  सात वर्षों तक उन्होंने छोटानागपुर डायोसिस में सेवा प्रदान किया। 
                      

छोटानागपुर डायसिस के चतुर्थ बिशप - राइट रेव्ह केनेथ केनेडी(1926 - 1936) तक 


बिशप केनेडी,दल्विन मिश्नरियों  के साथ, 1892 में रांची आए थे।  1926 में बिशापीय सेवा के लिए स्वंय को डायोसिस के लिए समर्पित कर दिया। वे मुंडारी भाषा के विद्वान थे। इन्होंने प्रार्थना पुस्तक का मुंडारी अनुवाद किया . 1926 - 1936 तक डायोसिस के कार्यों को संभाला। 


 
छोटानागपुर डायसिस के पांचवें बिशप - राइट रेव्ह  जोर्ज नोवेल हॉल  (1936-1957) तक 


30 दिसंबर 1936 को रेव्ह नोवेल हॉल का बिशप पद पर अभिषेक नागपुर में हुआ। 03 दिसंबर को संत पौल्स कथीड्रल में उनका प्रतिष्ठापन हुआ . डिस्ट्रिक्ट मिशनरी के रूप में इटकी में उन्होंने सेवा दी।  डी सी वाई एम की शुरुआत के लिए पहल इन्होंने किया।  1957 में डायोसिस ने बिशप नोवेल हॉल को पांचवे और अंतिम  मिशनरी बिशप के रूप में बिदाई दी। 


 छटवें बिशप - राइट रेव्ह सदानंद अविनाश विश्राम दिलबर हंस  (1957-1975) तक


बिसप दिलबर हंस का जन्म 30 जनवरी 1930 को रामतोल्या में हुआ था, पिता थोमा हंस पाद्री थे।  प्रारंभिक शिक्षा रामतोलोया, कामडरा तथा मैट्रिक की पढाई संत कोलंबा हजारीबाग  में किये, स्नातक की शिक्षा भी संत कोलंबा हजारीबाग से ही ग्रहण किया।  1941 से 1944 तक बिशप कोलेज में रहकर डिप्लोमा की पढाई पूरी की।  1944  में पुरोहिताभिषेक हुआ।  1944 - 1957 तक पुरोहितीय सेवकाई मुरहू में दिए 13 अक्टूबर 1957 को संत पौल्स कथीड्रल में इनका बिशपीय अभिषेक प्रथम स्वदेशी बिशप के रूप में हुआ। छोटानागपुर के डायोसिस के प्रथम स्वदेशी बिशप 12 जनवरी 1993  को प्रभु में सो गए . इनका दफ़न संत पौल्स कथीड्रल परिसर रांची में कथीड्रल के पूर्व दिशा में किया गया। 

  
छोटानागपुर डायसिस के सातवें बिशप - राइट रेव्ह सत्येन्द्र कुमार पात्रो   (1975- 1979) तक


बिशप पत्रों का पदाभिषेक संत पौल्स कथीड्रल कोलकत्ता में हुआ।  जबलपुर डायोसिस के बिशप पात्रो सातवें बिशप के रूप में छोटानागपुर डायोसिस 1975 में आए।  बिशप बनने से पूर्व वे मुरहू  में बिशप हब्बक थियोलोजिकल कोलेज के प्रिंसिपल भी रहे थे। 


छोटानागपुर डायसिस के बिशप आठवें - राइट रेव्ह जॉन ई टूटी  (16.08.1981 - 31.10.1981) तक


मान्यवर पुरोहित जॉन ई टूटी बिशप पदाभिषेक 26 जुलाई 1981 में दिल्ली के सी एन आई कथीड्रल में हुआ।  बिशप होने से पूर्व वे हजारीबाग तथा बोकारो में पेरिश पुरोहित थे।  16 . 08. 1981 को डायसिस के आठवें बिशप के रूप में, रांची कथीड्रल में इनका प्रतिष्ठापन हुआ।  किन्तु शारीरिक अस्वस्थता के कारण मात्र तीन महीने तक ही डायोसिस की चरवाही कर पाए। 


छोटानागपुर डायसिस के नौवें बिशप - राइट रेव्ह जॉन अल्फ्रेड गोंसाल्विस (1982 -1986 ) तक


बिशप गोन्साल्विस का पदाभिषेक 1976  में हुआ , उस समय वे कलकाता डायोसिस के आर्च डीकन थे . छोटानागपुर डायसिस के नौवें बिशप के रूप में उनका प्रतिष्ठापन 01 जून 1982 में संत पौल्स कथीड्रल रांची में हुआ।  उनके बिशपीय काल में सी एन आई संविधान को हमारे डायोसिस में अपनाया गया। चार वर्षों तक उन्होंने छोटानागपुर डायसिस  में समर्पित सेवा दिए और 01 अप्रेल 2003  को उनका देहांत हो गया। 


छोटानागपुर डायसिस के दसवें  बिशप - राइट रेव्ह जेड जेम्स तेरोम  (1986 -2006) तक


बिशप तेरोम का जन्म वर्तमान खूंटी जिला के अंतर्गत हेमरोम गाँव में 28 फ़रवरी 1941 को हुआ . इनकी प्रारंभिक शिक्षा मरंगहदा, मुरहू व संत पौल उच्व विद्यालय में हुई।  संत कोलंबस हजारीबाग से ग्रेजुएशन तथा रांची विश्वविद्यालय से एम ए की डिग्री हासिल की। उन्होंने बिशप्स कोलेज कलकाता से बी डी किया तथा उन्होंने एम टी एच भी किया। बिशप तेरोम का डीकन अभिषेक अभिषेक 06 जून 1971 को तपकरा तथा पुरोहिताभिसेक इटकी में हुआ।  बिशप पदाभिषेक 25 मई 1986 को संत पौल कथीड्रल रांची में संपन्न हुआ .बिशपीय सेवकाई के दौरान शिक्षा के क्षेत्र में उनकी भूमिका अहम् रही। डायोसिस की देखभाल करने के अलावा सी एन आई की डिप्टी मोडरेटर (1998 - 2001 ) तथा मोडरेटर (2001- 2005) के रूप में भी सेवा दिए। 16 फ़रवरी 2017 को प्रभु में सो गए एवं 18 फ़रवरी 2017 को बिशप तेरोम का दफ़न संत पौल्स कथीड्रल परिसर रांची में कथीड्रल के पूर्व दिशा में किया गया। 



छोटानागपुर डायसिस के ग्यारहवें  बिशप बासिल बाल्या बास्के   (2007 से अब तक ) 

डायसिस के वर्तमान बिशप बासिल बाल्या बास्के का जन्म 27 दिसंबर 1960 को संताल परगना के हिरणपुर स्थित संत लुक अस्पताल में हुआ था। आरंभिक शिक्षा तालझारी स्थित संत जॉन मध्य विद्यालय में हुआ उन्होंने उच्च विद्यालय की शिक्षा भागलपुर से तथा स्नातक की पढाई विज्ञान विषय पर साहेबगंज विश्वविद्यालय से पूरी की। 1990 इसवी में बिशप हब्बक धर्म महाविद्यालय में उन्होंने दाखिला लिया। 1994 में डीकन के पद पर पदाभिषेक तथा अगले ही साल इनका पुरोहिताभिषेक हुआ। बी डी की शिक्षा बिशप्त कोलेज तथा एम टी एच की शिक्षा गुरुकुल से पूरा किया। पुरोहित के रूप में लोहरदगा, डूरु तथा टाटानगर पेरिश में सेवा दिए। डायसिस के ग्यारहवें बिशप के रूप में 28.10.2007 में इनका बिशपीय पदाभिषेक संत पौल्स कथीड्रल रांची में हुआ।